दिवाली का त्यौहार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है।

 इस समय पूजा करने पर भक्तों को धनलाभ हो सकता है और सभी कष्टों की मुक्ति मिलती है।

दिवाली की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 36 मिनट तक है।

 इस साल अमावस्या तिथि 12 नवंबर को दोपहर  2 बजकर 44 मिनट से शुरू होगी और 13 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 56 मिनट पर समाप्त होगी।

 इसलिए दिवाली का पर्व 12 नवंबर को मनाया जाएगा। दिवाली की पूजा प्रदोष काल में की जाती है।

 दिवाली की पूजा में भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। पूजा में आरती, भजन और हवन आदि किया जाता है।

 पूजा के बाद मिठाई और पकवानों का भोग लगाया जाता है। दिवाली का त्यौहार खुशियों और उल्लास का त्यौहार है।

दिवाली का त्यौहार प्रकाश और अंधकार के बीच संघर्ष का प्रतीक है। इस दिन लोग भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं और उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं।

दिवाली का त्यौहार एक ऐसा अवसर है जब लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशियां मनाते हैं।

दिवाली का त्यौहार हिंदुओं का सबसे बड़ा त्यौहार है। इस दिन लोग अपने घरों को सजाते हैं, नए कपड़े पहनते हैं, मिठाई और पकवान बनाते हैं

दिवाली पूजा करने का सबसे शुभ समय सूर्यास्त के बाद का होता है, जिसे 'प्रदोष' कहा जाता है।

इस समय का चयन प्रदोष के दौरान अमावस्या तिथि (अमावस्या) की उपस्थिति पर आधारित है।

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